Friday, November 6, 2009

ग़ज़ल - तमन्ना

कोई तमन्ना मेरे दिल में संभल गई है ,
मेरे ख्यालों में अब तुम्हारा दबाव कम है ।

नज़र की मैली नफरतों से ढक चुका हूँ ,
बह रहा था जो हद से ज्यादा लगाव कम है ।

हज़ार मोडों में मुड़ के मैंने देख लिया है ,
मेरी सड़क में अब तुम्हारा रिसाव कम है ।

हर एक मौसम खिजा का मौसम मेरे शहर में ,
मेरी वज़ह में अब तुम्हारा झुकाव कम है ।

3 comments: