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उस रात बहुत तेज़ धूप थी तुम्हारे मकान के ठीक सामने जो आम का बगीचा है वही अकेला खडा था मैं और तुम झाँक रही थी घर की बालकनी से तुम्हे वहम था कहीं वो मैं तो नहीं और मुझे यकीन है ये ख्वाब ही होगा । अक्षय बाफिला .
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