कहाँ ढूढ़ुँ कहाँ खोजुं भावना का अंत बिंदु ,
मेरे मन की स्थिरता का माँगता हूँ अंत बिंदु .
शून्य से शुरूवात का स्राव कैसे रुकेगा,
बीज की अस्थिरता का चाहता हूँ अंत बिंदु.
थके हुए मार्गों का विश्राम पटल खोल दो,
मैं पगों की प्यास का ढूंढता हूँ अंत बिंदु.
जीवन् की परिधि में कहाँ मृत्यु का निवास हो,
व्रत के तो चारों ओर घूमता है अंत बिंदु.
अक्षय बाफिला।
अक्षय बाफिला।




