Thursday, November 5, 2009

ग़ज़ल - कोई मिलेगा....


चल पड़ा हूँ रास्ते में , रहनुमा कोई मिलेगा.
में अकेला हूँ अभी , दर्मियाँ कोई मिलेगा.

इस नज़रिए की नज़र में , दूर तक कोई नही है.
न मिला कोई मुझे तो , फासला कोई मिलेगा.

बेफिक्र है क़दमों की आहट , चुप सुनाई देती नही,
टिकटिकी बांधे है लम्हा , बेखबर कोई मिलेगा.

जाने किसलिए है लाजिम वक्त की रफ्त्गी

राह के हर मोड़ पर बेनवा कोई मिलेगा।

चल पड़ा हूँ रास्ते में , रहनुमा कोई मिलेगा.

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