चल पड़ा हूँ रास्ते में , रहनुमा कोई मिलेगा.
में अकेला हूँ अभी , दर्मियाँ कोई मिलेगा.
इस नज़रिए की नज़र में , दूर तक कोई नही है.
न मिला कोई मुझे तो , फासला कोई मिलेगा.
बेफिक्र है क़दमों की आहट , चुप सुनाई देती नही,
टिकटिकी बांधे है लम्हा , बेखबर कोई मिलेगा.
जाने किसलिए है लाजिम वक्त की रफ्त्गी
राह के हर मोड़ पर बेनवा कोई मिलेगा।
चल पड़ा हूँ रास्ते में , रहनुमा कोई मिलेगा.
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