अक्षय बाफिला।
Sunday, December 9, 2018
अंत बिंदु .
कहाँ ढूढ़ुँ कहाँ खोजुं भावना का अंत बिंदु ,
मेरे मन की स्थिरता का माँगता हूँ अंत बिंदु .
शून्य से शुरूवात का स्राव कैसे रुकेगा,
बीज की अस्थिरता का चाहता हूँ अंत बिंदु.
थके हुए मार्गों का विश्राम पटल खोल दो,
मैं पगों की प्यास का ढूंढता हूँ अंत बिंदु.
जीवन् की परिधि में कहाँ मृत्यु का निवास हो,
व्रत के तो चारों ओर घूमता है अंत बिंदु.
अक्षय बाफिला।
अक्षय बाफिला।
Friday, December 7, 2018
Wednesday, December 5, 2018
जज़्ब जज़्बात बदलने लगे हैं।
जज़्ब जज़्बात बदलने लगे हैं ,
अबके हालात बदलने लगे हैं।
वो तो ख्वाहिश में रूठ जाता है ,
अब के ख्वाहिश बदलने लगे हैं।
हम रहें या न रहें खुद में ,
तुम में खुद को बदलने लगे हैं।
एक तस्वीर पुरानी दिखाई देती है ,
नयी तस्वीर में जब से ढलने लगे हैं।
आसमान इतना खुला कभी भी न था ,
ज़मीं में बादलों से लड़ने लगे हैं।
अक्षय बाफिला।
अबके हालात बदलने लगे हैं।
वो तो ख्वाहिश में रूठ जाता है ,
अब के ख्वाहिश बदलने लगे हैं।
हम रहें या न रहें खुद में ,
तुम में खुद को बदलने लगे हैं।
एक तस्वीर पुरानी दिखाई देती है ,
नयी तस्वीर में जब से ढलने लगे हैं।
आसमान इतना खुला कभी भी न था ,
ज़मीं में बादलों से लड़ने लगे हैं।
अक्षय बाफिला।
Tuesday, December 4, 2018
आज़ाद हो तुम ।
जाओ के पंछियों को अपना दोस्त बना लो ,
जाओ के पेड़ों की शाखों को नशेमन बना लो ।
ये घरोंदों में तुम्हें क्यों कैद रहना है ?
इन झगड़े फसादों से क्या उम्मीद है तुम्हें,
बांध के रक्खी हैं जो बेड़ियाँ तुमने ,
तोड़ दो ,
अब साँसों को भी सांस लेने दो ,
एक नये बदलाव का आगाज़ हो तुम ,
ये धरती आसमां और सारा जहां हो तुम ,
क़ैद को भी अब फ़िक्र है तुम्हारी ,
उड़ जाओ , उड़ जाओ ,
आज़ाद हो तुम ।
अक्षय बाफिला।
Monday, December 3, 2018
Thursday, November 29, 2018
बस एक बात का झगड़ा है और कुछ भी नहीं .
बस एक बात का झगड़ा है और कुछ भी नहीं ,
जज़्बात का झगड़ा है और कुछ भी नहीं ।
रुख़सती रुख़ में दिखाई देने लगे जब ,
कुछ तो मालूमात का झगड़ा है और कुछ भी नहीं ।
ये कुछ खासमखास का पहरा है और कुछ भी नहीं ।
एक मुलाक़ात में कौन किसी का होता है ,
कुछ मुक़म्मल हुआ है और कुछ भी नहीं ।
दायरे दायरों में रहने दो ,
फ़ासलों का फैसला है और कुछ भी नहीं ।
अक्षय बाफिला .
Tuesday, November 27, 2018
अलविदा मोहम्मद अज़ीज़ साहब । 1954 - 2018
मोहम्मद अज़ीज़ साहब सबके अज़ीज़ थे । 19s के supardupar हिट गानों में उनका नाम दर्ज है उनकी आवाज़ दर्ज है । आज भी उनकी आवाज़ में वही रवानगी थी । उनके गाये गाने कोई कभी भी नहीं भूल सकता । उन्होंने ' प्यार हमारा अमर रहेगा ' ' तेरी बेवफाई का शिकवा ' ' फूल गुलाब का ' 'My name is lakhan' जैसे और भी कई सुपर हिट गाने हिंदी फिल्म जगत को दिये । जो आज भी आम जनता के दिलों में बसे हुए हैं । बहुत दुःखद है के 27 नवम्बर 2018
को हमने संगीत जगत के इस हीरे को खो दिया । लेकिन उनकी आवाज़ हमेशा हमारे दिलों में राज़ करेगी ।
आपकी आवाज़ को सलाम , आपको सलाम । अलविदा अज़ीज़ साहब ,
आप सबके अज़ीज़ थे ।
आप सबके अजीज़ रहेंगे ।
* अक्षय बाफिला *
Monday, November 26, 2018
आजकल वो बिल्कुल भी सफ़ाई नहीं देता
कभी मौजूद होता है कभी दिखाई नहीं देता ,
आजकल वो बिल्कुल भी सफ़ाई नहीं देता ।
आजकल वो बिल्कुल भी सफ़ाई नहीं देता ।
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