खाली खाली शाम चली है,
आवो कुछ नग्मात बुनें.
दिल के खुश रखने को यारो,
अपने कुछ जज़्बात बुनें.
दर्द कहाँ अब दर्द रहा है,
दर्द से अब कोई दर्द नहीं.
चोटें मरहम बन बैठी हैं,
हम किस झगडे की बात करें.
दिल के..............................................
फिर कहाँ ये दुनियादारी,
रिश्ते नाते और ये सब कुछ.
जीने की अब एक वजह है,
जीने के हालात बुनें.
दिल के.............................................
पत्थर से यूँ बातें करना,
अब अपनी आदत ऐसी है.
पत्थर की एक मूरत ने बोला,
आवो कुछ एहसास बुनें.
दिल के खुश रखने को यारो,
अपने कुछ जज़्बात बुनें.
अक्षय बाफिला।
आवो कुछ नग्मात बुनें.
दिल के खुश रखने को यारो,
अपने कुछ जज़्बात बुनें.
दर्द कहाँ अब दर्द रहा है,
दर्द से अब कोई दर्द नहीं.
चोटें मरहम बन बैठी हैं,
हम किस झगडे की बात करें.
दिल के..............................................
फिर कहाँ ये दुनियादारी,
रिश्ते नाते और ये सब कुछ.
जीने की अब एक वजह है,
जीने के हालात बुनें.
दिल के.............................................
![]() |
| खाली खाली शाम चली है |
अब अपनी आदत ऐसी है.
पत्थर की एक मूरत ने बोला,
आवो कुछ एहसास बुनें.
दिल के खुश रखने को यारो,
अपने कुछ जज़्बात बुनें.
अक्षय बाफिला।

No comments:
Post a Comment