Friday, November 6, 2009
विवशता
मेरी विवशता पर तुम अंकुश मत लगाओ
ये मेरी विवशता ही मेरी जीत है ।
मैं विवश हूँ मैं हार नही सकता ,
मैं समझ नही पा रहा ,
मेरा साथ कोई देना नही चाह रहा
या
मैं ही किसी को अपना नही पा रहा ।
अंत मैं
मैं अपनी विवशता का हाथ पकड़े
निकल पडुंगा मंज़िल की ओर ,
ना तुम रोक पाओगे,
और ना मैं ही रुक सकुंगा ।
ऐसे वक्त के खंडहर में
एक कमरा है मेरा
जहाँ विवशता के जालों में ,
में मकड़ी की तरह
अपना घर बुनता हूं
में अपना एक शहर बुनता हूं
पर
तुम मेरी विवशता पर अंकुश मत लगाना,
ये विवशता ही मेरी जीत है ।
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