Thursday, November 5, 2009

एक एकड़ आसमान लेकर


मैं घर बनाऊंगा
एक एकड़ आसमान लेकर
घर में सपनों की चिनाई बहुत पक्की होगी
उन्हें हकीकत नही होने दूंगा
नही तो दीवार टूट जायेगी
घर बिखर जाएगा ।
मैं घर बनाऊंगा

एक एकड़ आसमान लेकर

एक एकड़ आसमान लेकर ।
हवावों सा रंग ही सही है दीवारों पर ,
सन्नाटों के दरवाज़े , खिड़की
सब अच्छे तो लगेंगे
प्रियतम तुम रहोगे ना संग मेरे
मैं घर बनाऊंगा
एक एकड़ आसमान लेकर ।
तुम कविता
तुम सुर
तुम चित्र हो एक उजाले सा
में तुमको सजाऊंगा घर में
हर कोना कोना सजा रहे
हर स्वप्न सलोना बचा रहे
में स्वप्न सजाऊंगा
एक अँधेरी रात को लेकर
हाँ में घर बनाऊंगा
एक
एकड़ आसमान लेकर ।

अक्षय बाफिला। 

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