Friday, January 7, 2011

हिमालय की गोद में

हिमालय तेरी गोद में मेरा बचपन बीता
माँ बापू से डाँट खा कर, अपने गुस्से को शांत करने के लिए मैं तुझे ही देखा करता था
तेरी शांत बर्फ की चोटियाँ मुझे शांत रहने का संदेश दिया करती थी
मैं उस समय शांत हो जाता था
और शांत हूँ अभी भी इस अशांत दुनिया में
तेरी अडिग चोटियाँ मुझे सिखाती रही
अपनी ज़िद पर अपने लक्ष्‍य पर अडिग रहना
मैं अडिग हूँ अभी भी
मुझे तेरी तरह खरा उतरने में अभी समय लगेगा क्यूंकी मैं हिमालय नही
मैं दूर दुनिया की इस चहल पहल में ज़रूर व्यस्त हूँ
लेकिन मेरा शांत मन मेरे लालच का भी विद्रोह करता रहता है
मुझे तेरी ही तरह बिना लालच के खड़ा होना है
जानता हूँ व्यर्थ की बात है
लेकिन अपनी गोद देकर जो तूने
मेरा जन्म सहज कर दिया था
मेरी मृत्यु की योजना भी तू अपनी ही गोद में करना .

अक्षय बाफिला। 
7 -जनवरी -2011
हिमालय बेरीनाग से " हिमालय की गोद में "