Thursday, November 5, 2009

तुम्हारे लिए

में क्या दूँ तुम्हें
में तो हूँ ना !
ये लो ये ख्वाब मेरे , जहाँ रात तुम्हारी है।
ये लो ये अरमान मेरे , जहाँ तुम मेरे हो ।
ये लो ये पैगाम मेरे , तुम्हारे पते पर ।
ये लो इल्जाम मेरे सर पर , तुम्हारे ही लगाये हुए ।
ये लो ये मेहरबानियाँ , तुमसे ही हो गई थी ।
तुमसे अच्छा तुम्हारे लिए और क्या हो सकता है ?

क्या हो सकता है ?
में हूँ ना
तुम्हारे लिए ।


अक्षय बाफिला। 

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