वो दौर था जब तुम ख़त लिखा करती थी
तुम्हारे ख़त में लिखे शब्दों से मैं
तुम्हारे हाथों की छुवन को महसूस कर लिया करता था
कभी कभी तुम्हारे आँसू के धब्बे
ख़त में स्याही बिखेर देते थे
मैं समझ जाता था तुम रोई होगी
मुझे याद करके
ना जाने कितनी शिकायतों से भरा रहता था तेरा ख़त
जैसे कोई नज़्म बाँध के मेरे कलेजे में चिपका दी हो तुमने
आजकल तुम sms foward कर देती हो
अच्छा नही लगता है.
अक्षय बाफिला।
तुम्हारे ख़त में लिखे शब्दों से मैं
तुम्हारे हाथों की छुवन को महसूस कर लिया करता था
कभी कभी तुम्हारे आँसू के धब्बे
ख़त में स्याही बिखेर देते थे
मैं समझ जाता था तुम रोई होगी
मुझे याद करके
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जैसे कोई नज़्म बाँध के मेरे कलेजे में चिपका दी हो तुमने
आजकल तुम sms foward कर देती हो
अच्छा नही लगता है.
अक्षय बाफिला।
