Friday, November 6, 2009

बातें

कोरे पन्ने पर लिखी बातें ,
मेरे दिमाग पर टिकी बातें ,
उफ़ ! ये माहौल पर सजी बातें ,
झूठे तसव्वुर पर अडी बातें ,
मेरे टेबल पर पड़ी बातें ,
बातें
कलम की स्याही पर भरी बातें ,
ग़म की दहलीज पर खडी बातें ,
बीते कल की रही बातें ,
यूँ ही तनहा पली बातें ,
तुम्हारे न होने से कितना कुछ है
तुम होगे तो एक बात और सही .....

1 comment:

  1. yeah... less pain & your sharing will be more...with people,..... everyone likes that afterwards, you'll think less at that time! <:-D

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