Saturday, December 25, 2010

ग़ज़ल- कुछ नये शेर

अब वहाँ जाकर के जिया जाएगा
जहाँ ज़िक्र तुम्हारा किया जाएगा.

हथेली की लकीरों पे भरोसा क्या करना
किस्मत का लिखा भी बदल दिया जाएगा.

इन उसूलों में भी अब वो समझ ना रही
ख़ुद उसूलों की तरह निभ लिया जाएगा.

खेल हवाओं के संग ही अच्छा होता है
खुद को हार के ही जीत लिया जाएगा.

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