Monday, December 20, 2010

एक खिड़की चाहिए

मैं नही माँगता हूँ
ट्यूब लाइट की चकाचोंध
इस शहर में
ये झोपड़ी ही मेरा बँगला है,
तुम देखना
इस बंगले में लगे बल्ब
जो जलते ही नहीं हैं,
एक दिन
तुम्हारे शहर में उजाला करेंगे,
मुझे झाँकने के लिए
बस एक खिड़की चाहिए.

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