Monday, November 29, 2010

sms - ना जाने कितनी शिकायतों से भरा रहता था तेरा ख़त जैसे कोई नज़्म बाँध के मेरे कलेजे में चिपका दी हो तुमने

वो दौर था जब तुम ख़त लिखा करती थी
तुम्हारे ख़त में लिखे शब्दों से मैं
तुम्हारे हाथों की छुवन को महसूस कर लिया करता था
कभी कभी तुम्हारे आँसू के धब्बे
ख़त में स्याही बिखेर देते थे
मैं समझ जाता था तुम रोई होगी
मुझे याद करके
sms 
ना जाने कितनी शिकायतों से भरा रहता था तेरा ख़त
जैसे कोई नज़्म बाँध के मेरे कलेजे में चिपका दी हो तुमने
आजकल तुम sms foward कर देती हो
अच्छा नही लगता है.

अक्षय बाफिला। 

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