Thursday, November 18, 2010

मेरे गाँव की कमी है

मेरे गाँव की कमी है
के वो शहर नही है
वहाँ सड़कों पर रेड लाइट नही है
और चहल पहल नही है,
हाँ! ये मेरे गाँव की कमी है
मेरे गाँव में पेड़ों के हैं जंगल
जहां साँस लेती है ज़ॅमी
जहाँ जानवर जीते हैं
अपने हौसलों के साथ
मेरे गाँव में पत्थरों के जंगलों की कमी है
मकान तो हैं मगर
फ्लेट ही नहीं हैं
ये मेरे गाँव की कमी है.
जवान हौसलों में अब सीमेंट लग चुका
बन गई दीवारें ईंट ढक चुकी
जो पल रही थी जिंदगी
वो शहर को गयी
खा के दाना पानी गाँव का
शहर को गयी.
नौकर बनने का रिवाज़
अब भी चल रहा
मेरे गाँव में तो नौकरी भी नही है
ये मेरे गाँव की कमी है
वो शहर नही है
मेरे गाँवकी कमी है.

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